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तेरी यादों की लहरें आयीं और लौट भी गयीं
पर ज़हन में अब कोई ख़याल उगता ही नहीं
सैलाबों के बाद ज़मीं बंजर भी हो जाती है
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बड़ी मशक्क़त से खड़ी करती हूँ रोज़ नए तर्कों की इमारतें
दिल पे समझदारी का शहर बसने का गुमां,भला लगता है
तेरी यादों की बस एक लहर भर, मुझे फिर से रेत कर जाती है
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तेरी यादों की लहरें आयीं और लौट भी गयीं
पर ज़हन में अब कोई ख़याल उगता ही नहीं
सैलाबों के बाद ज़मीं बंजर भी हो जाती है
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बड़ी मशक्क़त से खड़ी करती हूँ रोज़ नए तर्कों की इमारतें
दिल पे समझदारी का शहर बसने का गुमां,भला लगता है
तेरी यादों की बस एक लहर भर, मुझे फिर से रेत कर जाती है
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बहुत खूब कहा है :
ReplyDeleteसैलाबों के बाद ज़मीं बंजर भी हो जाती है
थोडे़ में बहुत ज्यादा
सपने बुनने और उनके सच होने में कितना फर्क होता है ? सुन्दर भाव..
ReplyDeleteतेरी यादों की बस एक लहर भर, मुझे फिर से रेत कर जाती है....बहुत भावपूर्ण रचना जो सहज ही दिल को छूती है...बधाई!!!!!!! मैंने भी एक नई पोस्ट डाली है आपका स्वागत है...
ReplyDeletebehtareen...........bas itna hi kahoonga
ReplyDeletehaan ek baat aur kuch khayaal udhaar de sako to post kar dena...........:)
ReplyDeleteबहुत ही सुन्दर भाव है..और उतनी ही गहराई भी
ReplyDeleteबेहद खूबसूरत रचना
आज की आवाज
bahut khub....
ReplyDeletebahut hi sunder rachna likhi hai aapne badhai...
ReplyDeletegahre artho ke ssath likha hai ...aaj kafi sarri kavitai padhi aapki ...aise hi likhte rahiye
ReplyDelete1st one is good...second one is plain
ReplyDeleteअच्छी रचनाएँ हैं....बिना रुके लिखते रहिये..लिखते रहिये..लगातार..मेरी शुभकामनाएं...
ReplyDeleteloved both ur trivenis lady... :)
ReplyDeleteaayeeye dekhiye court k faisle par ek cartoon....
ReplyDeleteis samaz ka kya hoga.....
vartika ji....
apne moolywan vicharo se mujhe avgat karayen.....
beautiful
ReplyDeleteबड़ी मशक्क़त से खड़ी करती हूँ रोज़ नए तर्कों की इमारतें
ReplyDeleteदिल पे समझदारी का शहर बसने का गुमां,भला लगता है
तेरी यादों की बस एक लहर भर, मुझे फिर से रेत कर जाती है
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Mujhe yeh triveni bahut achhi lagi bahut hi achhi!!