पर नीवें जमीं पर रखी ही कहाँ होती हैं ये? लाशों की गाड़ियों पर घमंड के चक्कों से चलती फिरती हैं ये दीवारें...कब दो टकरायें, कब दम घुटे...कुछ और लाशें होम हो...लाल गाड़ियों की servicing भी मुफ्त हो जिससे.
पता है क्या? आपको एक शब्द में भी कहा जाये तो नज़्म लिख सकती हैं... Now, that is called sheer TALENT
आपकी रचनाएं कबीले तारीफ हैं... इस से पहले वाली पोस्ट तो बेहतरीन शिल्प वाह... इन सुन्दर रचना के लिए आभार ... आपकी यह रचना और ब्लॉग मैंने चर्चामंच पर रखा है आज ... आप वहाँ और अमृतरस ब्लॉग में आ कर अपने विचारों से अनुग्रहित करें सादर
:)
ReplyDeleteसिली जमीन पर भी अट्टालिकाएँ खड़ी कर देते हैं और स्वार्थ की थूनी उन्हें थामे रहती हैं.
ReplyDeleteएक मुद्द्त हो गयी थी पढे आपको…। अच्छा लगा वापिस सक्रिय देख के और इस छुटकु नज़्म ने बहुत बड़ी बात कही है। वर्मा जी की बात से सहमति है । :)
ReplyDeleteआपके लिखे के लिए हमेशा की तरह वही है...Awesome!!
ReplyDeleteपर नीवें जमीं पर रखी ही कहाँ होती हैं ये?
लाशों की गाड़ियों पर घमंड के चक्कों से चलती फिरती हैं ये दीवारें...कब दो टकरायें, कब दम घुटे...कुछ और लाशें होम हो...लाल गाड़ियों की servicing भी मुफ्त हो जिससे.
पता है क्या? आपको एक शब्द में भी कहा जाये तो नज़्म लिख सकती हैं... Now, that is called sheer TALENT
:)
आमद बहुत देर से है...पर है मीठी :)
बहुत सुन्दर नज़्म ..एक विचार को सोचने पर मजबूर करती हूँ ...
ReplyDeleteआहें, आंसू, सिसकियाँ ..यह सब मज़हब की दीवार की तराई करती हैं ..और दीवार को मजबूत बना देती हैं
bahut achcha laga tumhe padhna,aur wo bhi itne samay ke baad............kavita bahut achchi hai...........
ReplyDeleteजब आँसू बहेंगे बेहिसाब, तब कहीं जाकर टूटेंगी ये दीवारें।
ReplyDeleteवाह.. क्या नज़्म है...
ReplyDeleteसोच में खो गया कहीं ....
मुट्ठी भर आसमान...
simply amazing....teer si thi ye nazm.bas chooti aur lagi...tooo good
ReplyDeletechand sabdon mein likhi hui gahri kavita !!
ReplyDeletethode se shabdon me bahut kuchh kah diya.....
ReplyDeletebahut sundar...
वर्तिका जी आपकी इस छोटी कविता में आपकी रचनात्मकता की झलक है . यह पुराना सवाल आज भी हमारे जीवन को प्रभावित कर रही है.. नियमित लिखे.. शुभकामना..
ReplyDeleteAwesome Vartika!
ReplyDeleteपसन्द आया ....कुछ अलग सा लिखती हो मगर प्रभाव शाली है !
ReplyDeleteशुभकामनायें !
Bahut hi sunder di,
ReplyDeletebadhai ho ....der se aane ke liye majrat chahunga.
बहुत बेहतरीन!!
ReplyDeleteचर्चा मंच से आपकी पोस्ट पर आना हुआ .अति सुंदर अभिव्यक्ति .
ReplyDeleteमेरे ब्लॉग 'मनसा वाचा कर्मणा' पर आपका हार्दिक स्वागत है .
बहुत गहन जीवन दर्शन को व्यक्त कर दिया है कुछ पंक्तियों में..आभार
ReplyDeleteआपकी रचनाएं कबीले तारीफ हैं... इस से पहले वाली पोस्ट तो बेहतरीन शिल्प वाह... इन सुन्दर रचना के लिए आभार ...
ReplyDeleteआपकी यह रचना और ब्लॉग मैंने चर्चामंच पर रखा है आज ... आप वहाँ और अमृतरस ब्लॉग में आ कर अपने विचारों से अनुग्रहित करें सादर
http://charchamanch.blogspot.com/2011/03/blog-post_04.html
http://amritras.blogspot.com
आपने काफी समय से कोई रचना पोस्ट नहीं की .. हम आपकी रचनाओ की इंतजारी में..
बेहद मारक कविता!! खूब लिखिये
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