Tuesday, November 30, 2010

एक पुराना सवाल ... एक पुराना ख़याल...

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कैसे खड़ी हो जाती हैं
वहाँ दीवारें
मजहबों की
जहाँ दबी होती हैं
आहें, आंसू, सिसकियाँ  

कमज़ोर नहीं पड़ती
सीली ज़मीं पे रखी नीवें....?
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20 comments:

  1. सिली जमीन पर भी अट्टालिकाएँ खड़ी कर देते हैं और स्वार्थ की थूनी उन्हें थामे रहती हैं.

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  2. एक मुद्द्त हो गयी थी पढे आपको…। अच्छा लगा वापिस सक्रिय देख के और इस छुटकु नज़्म ने बहुत बड़ी बात कही है। वर्मा जी की बात से सहमति है । :)

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  3. आपके लिखे के लिए हमेशा की तरह वही है...Awesome!!

    पर नीवें जमीं पर रखी ही कहाँ होती हैं ये?
    लाशों की गाड़ियों पर घमंड के चक्कों से चलती फिरती हैं ये दीवारें...कब दो टकरायें, कब दम घुटे...कुछ और लाशें होम हो...लाल गाड़ियों की servicing भी मुफ्त हो जिससे.

    पता है क्या? आपको एक शब्द में भी कहा जाये तो नज़्म लिख सकती हैं... Now, that is called sheer TALENT

    :)


    आमद बहुत देर से है...पर है मीठी :)

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  4. बहुत सुन्दर नज़्म ..एक विचार को सोचने पर मजबूर करती हूँ ...

    आहें, आंसू, सिसकियाँ ..यह सब मज़हब की दीवार की तराई करती हैं ..और दीवार को मजबूत बना देती हैं

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  5. bahut achcha laga tumhe padhna,aur wo bhi itne samay ke baad............kavita bahut achchi hai...........

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  6. जब आँसू बहेंगे बेहिसाब, तब कहीं जाकर टूटेंगी ये दीवारें।

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  7. वाह.. क्या नज़्म है...
    सोच में खो गया कहीं ....


    मुट्ठी भर आसमान...

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  8. simply amazing....teer si thi ye nazm.bas chooti aur lagi...tooo good

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  9. chand sabdon mein likhi hui gahri kavita !!

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  10. thode se shabdon me bahut kuchh kah diya.....

    bahut sundar...

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  11. वर्तिका जी आपकी इस छोटी कविता में आपकी रचनात्मकता की झलक है . यह पुराना सवाल आज भी हमारे जीवन को प्रभावित कर रही है.. नियमित लिखे.. शुभकामना..

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  12. पसन्द आया ....कुछ अलग सा लिखती हो मगर प्रभाव शाली है !
    शुभकामनायें !

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  13. Bahut hi sunder di,
    badhai ho ....der se aane ke liye majrat chahunga.

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  14. बहुत बेहतरीन!!

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  15. चर्चा मंच से आपकी पोस्ट पर आना हुआ .अति सुंदर अभिव्यक्ति .
    मेरे ब्लॉग 'मनसा वाचा कर्मणा' पर आपका हार्दिक स्वागत है .

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  16. बहुत गहन जीवन दर्शन को व्यक्त कर दिया है कुछ पंक्तियों में..आभार

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  17. आपकी रचनाएं कबीले तारीफ हैं... इस से पहले वाली पोस्ट तो बेहतरीन शिल्प वाह... इन सुन्दर रचना के लिए आभार ...
    आपकी यह रचना और ब्लॉग मैंने चर्चामंच पर रखा है आज ... आप वहाँ और अमृतरस ब्लॉग में आ कर अपने विचारों से अनुग्रहित करें सादर

    http://charchamanch.blogspot.com/2011/03/blog-post_04.html
    http://amritras.blogspot.com

    आपने काफी समय से कोई रचना पोस्ट नहीं की .. हम आपकी रचनाओ की इंतजारी में..

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  18. बेहद मारक कविता!! खूब लिखिये

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