Sunday, February 22, 2009

वारदातें


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रात टांगा था पूरा चाँद फलक पे,
जाने कौन बदल कर आधा रख गया :(

वारदातें अब बढ़ने लगी हैं शहर में!!
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3 comments:

अनिल कान्त : said...

वाह ...बहुत खूब ....

रात टांगा था पूरा चाँद फलक पे.... अच्छी लगी

praveen said...

रात टांगा था पूरा चाँद फलक पे,
जाने कौन बदल कर आधा रख गया !!

padker bahut achha laga .........

vakrachakshu said...

The best of your blog ...
main ruk ruk kar tabiyat se padh raha hoon ..

kafi din se kuchh likh nahi pa raha tha
ab dubara likhne ki icchha ho rahi hai :)