Friday, July 03, 2009

सरहद

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सरहदों में बँटे ही रहने दो जहां को
खुदा कहाँ तक हर इल्जाम को कन्धा देगा

खबर आयी है लोग अपने ही बागी हुए हैं
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8 comments:

M VERMA said...

वाह! जब अपने बागी होते है तभी तो नई सरहद बनती है
बहुत खूब

विनोद डोंगरे said...

really, all your poems are so interesting and experss the emotions in limited words...gooooood.

गौरव said...

यार ये तो कुछ ऐसा हुआ की प्यासे की प्यास और बढ़ा दी, जब इतनी अच्छी पंक्तियाँ लिखीं हैं तो कम से कम इतना विस्तार तो दो कि..................

rajdeep bhattacharya said...

wah! bahut khoob

Vinod said...

VERY powerful!!! Love the punch in your brevity!

श्रद्धा जैन said...

Wah kya baat kahi hai khabar aayi hai log baagi hue hai

bahut khoob

Suman said...

nice

Gaurav Sharma said...

Behtreen triveni.....kya baat hai ...bahut khoob!!