Tuesday, November 30, 2010

एक पुराना सवाल ... एक पुराना ख़याल...

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कैसे खड़ी हो जाती हैं
वहाँ दीवारें
मजहबों की
जहाँ दबी होती हैं
आहें, आंसू, सिसकियाँ  

कमज़ोर नहीं पड़ती
सीली ज़मीं पे रखी नीवें....?
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20 comments:

स्वप्निल कुमार 'आतिश' said...

:)

M VERMA said...

सिली जमीन पर भी अट्टालिकाएँ खड़ी कर देते हैं और स्वार्थ की थूनी उन्हें थामे रहती हैं.

Ravi Shankar said...

एक मुद्द्त हो गयी थी पढे आपको…। अच्छा लगा वापिस सक्रिय देख के और इस छुटकु नज़्म ने बहुत बड़ी बात कही है। वर्मा जी की बात से सहमति है । :)

Avinash Chandra said...

आपके लिखे के लिए हमेशा की तरह वही है...Awesome!!

पर नीवें जमीं पर रखी ही कहाँ होती हैं ये?
लाशों की गाड़ियों पर घमंड के चक्कों से चलती फिरती हैं ये दीवारें...कब दो टकरायें, कब दम घुटे...कुछ और लाशें होम हो...लाल गाड़ियों की servicing भी मुफ्त हो जिससे.

पता है क्या? आपको एक शब्द में भी कहा जाये तो नज़्म लिख सकती हैं... Now, that is called sheer TALENT

:)


आमद बहुत देर से है...पर है मीठी :)

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत सुन्दर नज़्म ..एक विचार को सोचने पर मजबूर करती हूँ ...

आहें, आंसू, सिसकियाँ ..यह सब मज़हब की दीवार की तराई करती हैं ..और दीवार को मजबूत बना देती हैं

yogesh dhyani said...

bahut achcha laga tumhe padhna,aur wo bhi itne samay ke baad............kavita bahut achchi hai...........

प्रवीण पाण्डेय said...

जब आँसू बहेंगे बेहिसाब, तब कहीं जाकर टूटेंगी ये दीवारें।

Shekhar Suman said...

वाह.. क्या नज़्म है...
सोच में खो गया कहीं ....


मुट्ठी भर आसमान...

saanjh said...

simply amazing....teer si thi ye nazm.bas chooti aur lagi...tooo good

Darshan said...

chand sabdon mein likhi hui gahri kavita !!

Manav Mehta said...

thode se shabdon me bahut kuchh kah diya.....

bahut sundar...

अरुण चन्द्र रॉय said...

वर्तिका जी आपकी इस छोटी कविता में आपकी रचनात्मकता की झलक है . यह पुराना सवाल आज भी हमारे जीवन को प्रभावित कर रही है.. नियमित लिखे.. शुभकामना..

Vinod said...

Awesome Vartika!

सतीश सक्सेना said...

पसन्द आया ....कुछ अलग सा लिखती हो मगर प्रभाव शाली है !
शुभकामनायें !

Ravi Rajbhar said...

Bahut hi sunder di,
badhai ho ....der se aane ke liye majrat chahunga.

Udan Tashtari said...

बहुत बेहतरीन!!

Rakesh Kumar said...

चर्चा मंच से आपकी पोस्ट पर आना हुआ .अति सुंदर अभिव्यक्ति .
मेरे ब्लॉग 'मनसा वाचा कर्मणा' पर आपका हार्दिक स्वागत है .

Kailash C Sharma said...

बहुत गहन जीवन दर्शन को व्यक्त कर दिया है कुछ पंक्तियों में..आभार

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति said...

आपकी रचनाएं कबीले तारीफ हैं... इस से पहले वाली पोस्ट तो बेहतरीन शिल्प वाह... इन सुन्दर रचना के लिए आभार ...
आपकी यह रचना और ब्लॉग मैंने चर्चामंच पर रखा है आज ... आप वहाँ और अमृतरस ब्लॉग में आ कर अपने विचारों से अनुग्रहित करें सादर

http://charchamanch.blogspot.com/2011/03/blog-post_04.html
http://amritras.blogspot.com

आपने काफी समय से कोई रचना पोस्ट नहीं की .. हम आपकी रचनाओ की इंतजारी में..

मनरागी said...

बेहद मारक कविता!! खूब लिखिये