कभी कभी तुम पर
क्रोध आता है
तो कभी दिल दर्द से
डूबा जाता है
"जाने कैसे होगे तुम"
ये सोच कभी चिंता करती हूँ
तो कभी अपनी असमर्थता पे
चिढ़ती हूँ, कुढ़ती हूँ
घटना, सिर्फ एक-----
तुम्हारा मुझे छोड़ ,
दूर चले जाना
और उस एक घटना के लिए
मेरी अनेक प्रतिक्रियाएं
सच ही तो है
'दिल चंचल होता है'
वक़्त के साथ 'गर
मेरे ही दिल का मौसम बदल गया
तो मौसम के साथ यदि
मेरे प्रति तुम्हारी भावनाएँ भी
बदल गयीं,
तो इसमें
तुम्हारा क्या दोष?
आखिर इंसान का दिल है
बदलाव तो मांगेगा ही...........
Sunday, June 22, 2008
Saturday, June 21, 2008
WARRANTY CARD
नया T.V. खरीदा
चला नहीं,
तो जाकर बदल आई
ऐसे ही कुछ बरसों पहले
एक बड़े से शोरूम से
भगवान् की एक मूरत
खरीद लायी थी
तब से रोजाना
सर झुकाती आ रही हूँ
उसके आगे
पर आज तक उसने मेरी
कोई दुआ नहीं सुनी
न ही कोई अर्जी
कुबूल की है
सोचती हूँ
बदल आऊं उसे भी एक रोज़
पर क्या करुँ
खुदा आता नहीं
WARRANTY CARD के साथ.
चला नहीं,
तो जाकर बदल आई
ऐसे ही कुछ बरसों पहले
एक बड़े से शोरूम से
भगवान् की एक मूरत
खरीद लायी थी
तब से रोजाना
सर झुकाती आ रही हूँ
उसके आगे
पर आज तक उसने मेरी
कोई दुआ नहीं सुनी
न ही कोई अर्जी
कुबूल की है
सोचती हूँ
बदल आऊं उसे भी एक रोज़
पर क्या करुँ
खुदा आता नहीं
WARRANTY CARD के साथ.
Sunday, April 20, 2008
gathri

यूँ यहाँ फर्श पर पड़ी हूँ
अपने ही पाँव आपस में गूँथ,
सर घुटनों पे टिका
ख़ुद को ख़ुद में ही
समेटती जाती हूँ
जैसे कोई गाँठ लगा रहा हो,
किसी गठरी में!
हाँ,
गठरी ही बना लिया है मैंने ख़ुद को
तुम्हारे जाने के बाद
और समेट कर बाँध लिया हैं
तुम्हारी यादों को
जो अब तक मेरे भीतर
करीने से सजी मिला करती थी
के सुना था कभी
‘गठरियों में धरा सामन
आसानी से नहीं मिलता'
फ़िर क्यूँ लोग अब भी मुझे देखते ही
तुम्हें मुझमे ढूँढ ही लिया करते हैं ??
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