Saturday, April 18, 2009

फासले


--------------------------------------------------------
ये शहर मुझे बस दौड़ता हुआ दिखता है,
पर दूरियां हैं, के घटती नहीं दिखती

अपनी धूरी पर घूमने से, फासले तय हुए हैं भला?
--------------------------------------------------------

7 comments:

Jyotsna Pandey said...

bahut khoob!
dhuri par ghoomane se faasale kam nahin hote ...................

love u

crazy devil said...

waah maza aa gaya

VaRtIkA said...

@jyotsana di
dhanyawaad di... love u 23456 :)

@crazy devil
thank u so mch...:)

Avinash Chandra said...

sundar

SANJU said...

wah vartika ji....bahut gehri soch.....

गौरव said...

बिल्कुल नही............पर अपनी धुरी पर घुमते घुमते चक्कर जरूर आने लगा.............लग रहा है, सरेशाम पी ली है..........ढेर साड़ी...........

गौरव said...

सॉरी वो साड़ी नही है.................सारी है...........और ये मेरी गलती नही है...........google translitration ki hai.............