Sunday, December 13, 2009

तेरी यादें

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जब भी चाहा
तेरी यादों को दफन करना
तुझ संग बीता
हर लम्हा मुझे
साँस लेता हुआ मिला

अब तुम ही कहो
ज़िन्दगी का गला कैसे घोंटूं ?
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13 comments:

shashank mehta said...

Aapko ye blog padhna chahiye

http://maiaurmerisoch.blogspot.com

Avinash Chandra said...

bahut khoob........mat ghontiye gala, yun hi likhte rahiye.
So, beautiful.

Ravi Rajbhar said...

Are....bapre
हर लम्हा मुझे
साँस लेता हुआ मिला....:)

M VERMA said...

ज़िन्दगी दफ्न नही की जा सकती
साँस लेते इन लम्हों को हवा देने की जरूरत है
बेहतरीन

Pankaj Upadhyay said...

superb... just awesome!!

संजय भास्कर said...

कम शब्दों में बहुत सुन्दर कविता।
बहुत सुन्दर रचना । आभार
ढेर सारी शुभकामनायें.

Sanjay bhaskar
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

Guttu said...

Bahut badhiya. Kam shabdo me bhi dil ko chu gayi yeh.

अलीम आज़मी said...

behtareen likha hai aapne ....

Gaurav Sharma said...

boond me saagar...dil se likhi nazm dimaag ke tadke ke saath...mindblowing!!

Ruppin said...

तुझ संग बीता
हर लम्हा मुझे
साँस लेता हुआ मिला

अब तुम ही कहो
ज़िन्दगी का गला कैसे घोंटूं ....itne kam lines me itna gehra likh lete hai log- mujhe kaha gaya thaa ki inko padhna aur padhoge ki tumhari hallat kharab ho jayegi--sach mei amazing.......

poemsnpuja said...

उफ्फ्फ...जैसे आह सी निकलती है. जैसे धक् से लगता है कहीं दिल कि धडकनों में.

ये लम्हे कमबख्त वाकई साँस लेते रहते हैं...क्या करें इनका!

boletobindas said...

वर्तिका ...यादें कभी पीछा छोड़ दें ये हो नहीं सकता.....गला दबा दें ये हो नहीं सकता....क्या करें यादों का दायरा निकलने ही नहीं देता कभी-कभी अपने से...

चंद पंक्तियों में गहरी बात

बालमुकुन्द अग्रवाल,पेंड्रा said...

बहुत सुंदर.